संसद सर्दी सत्र 2025: पास हुए 8 बिल, अब शान्ती और बीमा बिल पर बड़ा फैसला

संसद सर्दी सत्र 2025: पास हुए 8 बिल, अब शान्ती और बीमा बिल पर बड़ा फैसला

भारत में संसदीय कारवाही की गति हमेशा ही देश का न्यूरो कोर्टेक्स होती है, लेकिन संसद के सर्दी सत्र 2025नई दिल्ली ने इस साल कुछ नया किया। दिसंबर की ठंडी हवाओं के बीच, जब संसद का सत्र समाप्त हुआ, तो मंत्रालयों से लेकर आम नागरिक तक हर किसी के लिए कई बड़ी बातें सामने आईं। कुल 10 कानून पेश किए गए थे, जिनमें से 8 पारित होकर इतिहास बना रहे हैं। मुख्यमंत्री नहीं, लेकिन किरेन रिजिजू, केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार ने संवाददाताओं को यह स्पष्ट किया कि ये कानून अगले एक दशक में लाखों लोगों की जिंदगी बदल देंगे।

आइए देखते हैं कि क्या हुआ उस कमरे में जो देश का सबसे ऊँचा निर्णय लेने वाला अखाड़ा है। सत्र 15 बैठकों तक चलता रहा, जिसका अंत 19 दिसंबर 2025 को 'साइन डी' (Sine Die) कर दिया गया। यानी आगामी बजट सत्र तक सेशन खत्म। लेकिन इन 15 बैठकों में जो कुछ भी तैयार हुआ, उसे समझना जरूरी है क्योंकि इसका असर सीधे आपके बैंक बैलेंस और भविष्य की सुरक्षा पर पड़ने वाला है।

परमाणु ऊर्जा में निजी कंपनियों का एंट्री टाइम

सबसे बड़ी चर्चा थी 'SHANTI' बिल की। पूरा नाम है—Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Bill, 2025। इसे आप सरल भाषा में 'परमाणु ऊर्जा सुधार' कह सकते हैं। पुराने कानूनों, जैसे अणुऊर्जा अधिनियम 1962 और नागरिक उत्तरदायित्व अधिनियम 2010, की जगह लेने वाला यह कानून बहुत महत्वपूर्ण है।

यहाँ बात यह है कि पहले परमाणु पावर प्लांट केवल सरकार का क्षेत्र था। अब निजी निवेशकों को भी दखल देने की छूट मिल रही है। लक्ष्य है कि 2047 तक 100 GW की परमाणु क्षमता हासिल हो। सोचिए, 2070 तक हमें 'नेट-जीरो' बनना है, और इसके बिना यह मुश्किल है। बिल को लोकसभा में 15 दिसंबर को और राज्यसभा में 18 दिसंबर को पास किया गया, फिर रक्षा मंत्रालय ने इसे 20 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी से कानून बना दिया।

बीमा बाजार में 100% विदेशी निवेश का दरवाज़ा

अब दूसरी बड़ी बात 'सबका बीमा सबकी रक्षा' (Amendment of Insurance Laws) बिल है। फाइनेंस वाले इसे जानते हैं कि बीमा घटनाओं की गिरती प्रवृत्ति को कैसे रोका जाए। सरकार का दावा है कि इस बिल से भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा 74% से बढ़कर 100% हो गई है।

मतलब? अब विदेशी कंपनी अपनी पूरी कंपनी अपने नियंत्रण में ला सकती है। यह सिर्फ पैसा नहीं आएगा, बल्कि टेक्नोलॉजी भी आएगी। सरकार का मानना है कि इससे बीमा की पहुँच बढ़ेगी और हर भारतीय के पास सुरक्षा कवच होगा। इसे 17 दिसंबर को राज्यसभा में पास किया गया था। एक छोटा-सा लेकिन महत्वपूर्ण ट्विस्ट यह था कि साथ ही केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise) संशोधन बिल भी पास हुआ, जिससे तंबाکوउ उत्पादों पर कर की रचना बदली गई।

जो बिल पास नहीं हुए या रुके हुए हैं

हर खबर में थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव होता है, संसद में भी यही हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सितारामन द्वारा पेश किया गया 'Securities Markets Code' (SMC) बिल पास नहीं हुआ। इसे डिपोर्टर स्टैंडिंग कमेटी में भेज दिया गया है। यह बिल तीन पुराने कानूनों को मिलाकर एक मज़बूत ढांचा बनाना चाहता था। अगर आप शेयर बाजार के नियमों में व्यापारी हैं, तो आपको पता होगा कि SEBI Act और Depositories Act को एक साथ मेल्ट करना क्यों ज़रूरी है। हालाँकि, अभी वो फाइनल रूप नहीं ले पाए।

वहीं, शिक्षा सुधार के तहत 'Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill' भी लोकसभा में पेश हुआ था, लेकिन उसे जॉइंट पार्टमेंटरी कमेटी में भेज दिया गया। रिपोर्ट जनवरी 2026 की बजट सत्र की पहली भाग में दी जाएगी। यह दर्शाता है कि शिक्षा नीति में बदलाव को लेकर सरकार सावधानी बरत रही है।

GST और मनोहरपुरा का मामला

GST और मनोहरपुरा का मामला

मानिपुर का नाम संसद में अलग तरह से आया। GST परिषद के फैसलों को लागू करने के लिए 'Manipur Goods and Services Tax (Second Amendment) Bill, 2025' पास हुआ। इसका मतलब है कि वहां के कर स्लैब को दो मुख्य स्तंभों में लाया जाएगा: 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत। स्थानीय व्यापारियों के लिए यह आसान होना चाहिए। वहीं, ग्रामीण रोजगार गारंटी मिशन का बिल भी पास हुआ, जो गांव-गाूं में काम दिलाने के लिए एक कानूनी ढांचा देता है।

अगला चरण क्या?

संसद का ये सत्र खत्म हो गया है, लेकिन खेल तो अभी शुरू हुआ है। बजट सत्र 28 जनवरी 2026 को शुरू हो चुका है। अब 30 अधिक बैठकें होने वाली हैं। कई बिल जो आज रुके हुए हैं, उनकी तारीखें निकल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कानूनों का असर आर्थिक विकास पर पड़ेगा। अगर निजी क्षेत्र परमाणु ऊर्जा में एक्टिव हो जाता है, तो बिजली की कीमतें शायद आसान होंगी। अगर बीमा में FDI बढ़ा है, तो प्रीमियम प्लान सस्ते हो सकते हैं।

लेकिन क्या असल में ऐसा होगा? इसका जवाब मार्केट और समय देगा। तब तक हमें इंतज़ार करना पड़ेगा कि 2026 के बजट सत्र में ये बिल कहाँ रुकते हैं और कहाँ आगे बढ़ते हैं। यह सिर्फ एक सत्र का अंत नहीं, बल्कि देश के विकास की एक नई कहानी की शुरुआत है।

Akhtab Ki Sawaliya - Frequently Asked Questions

SHANTI बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

SHANTI बिल का मुख्य उद्देश्य भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेशकों को शामिल करना है। यह पुराने 1962 के कानूनों को बदलकर 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता लाने का लक्ष्य रखता है, ताकि ऊर्जा की जरूरतों को निजी और सार्वजनिक दोनों सेक्टर मिलकर पूरा कर सकें।

बीमा कानून में FDI सीमा में क्या बदलाव हुआ?

सबका बीमा सबकी रक्षा बिल के तहत बीमा कंपनियों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी गई है। इसका उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और बीमा तकनीकी का बेहतर उपयोग करके जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है।

सर्दी सत्र में कितने बिल पास हुए?

दिसंबर 2025 के सर्दी सत्र में कुल 10 सरकारी बिल पेश किए गए थे, जिनमें से 8 बिल सफलतापूर्वक दोनों सदनों में पास होकर कानून बन गए। इनमें वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े बिल शामिल थे।

कौन से बिल अगले सत्र तक टाल दिए गए?

सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड (SMC) बिल और विकसित भारत शिक्षा अधिनियम बिल को पास नहीं किया गया। इन बिलों पर विचार-विमर्श के लिए उन्हें संसदीय समितियों में भेज दिया गया है, जिनका परिणाम 2026 के बजट सत्र में मिल सकता है।