द्रौपदी मुर्मु: पहली आदिवासी राष्ट्रपति, 2022 के ऐतिहासिक चुनाव का सफर

द्रौपदी मुर्मु: पहली आदिवासी राष्ट्रपति, 2022 के ऐतिहासिक चुनाव का सफर

जब द्रौपदी मुर्मु ने भारत की राष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, तो यह केवल एक और चुनाव नहीं था। यह एक ऐतिहासिक मोड़ था। 18 जुलाई 2022 को हुए इस मतदान में, उन्होंने न केवल विपक्षी उम्मीदवार को हराया, बल्कि इतिहास रच दिया। वे भारत की पहली आदिवासी मूल की राष्ट्रपति बन गईं।

लेकिन कहानी सिर्फ जीत की नहीं है। यह उस प्रक्रिया की भी कहानी है जिसने लोकतंत्र की नींव को और मजबूत किया। भारतीय निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाया, जबकि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल समाप्त होने वाला था।

एक नया अध्याय: द्रौपदी मुर्मु का यात्रा

द्रौपदी मुर्मु पहले से ही राजनीतिक परिदृश्य में सक्रिय थीं। वे पहले झारखंड की राज्यपाल रही हैं। लेकिन राष्ट्रपति बनना एक अलग ही कला है। उनके प्रतिद्वंद्वी थे यशवंत सिन्हा, जो आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के वरिष्ठ नेता हैं। सिन्हा ने 'यूनाइटेड ऑप्पोजिशन' (संयुक्त विपक्ष) के टिकट पर लड़ाई लड़ी।

यहाँ बात दिलचस्प होती है। मुर्मु को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन मिला। दूसरी ओर, सिन्हा के पीछे विपक्षी दलों का एक बड़ा गुच्छा था। फिर भी, परिणाम स्पष्ट था। मुर्मु को कुल 676,803 वोट मिले, जो वैध वोटों का 64.03% है। सिन्हा को 380,177 वोट मिले, यानी 35.97%। यह अंतर लगभग 3 लाख वोट का था—एक बहुत ही बड़ी जीत।

मतदाताओं का उत्साह और प्रक्रिया की जटिलता

क्या आप जानते हैं कि इस चुनाव में मतदान की दर कितनी ऊंची थी? 99.12%। हाँ, आपने सही सुना। लगभग हर एक मतदाता ने अपनी राय दी। यह संख्या दिखाती है कि देश के नेताओं को इस पद के प्रति कितना महत्व है।

मतदान की प्रक्रिया काफी तकनीकी थी। इसे 16वें भारतीय राष्ट्रपति चुनावनई दिल्ली कहा जाता है। इसमें 4,796 योग्य मतदाता शामिल थे। ये लोग संसद (लोकसभा और राज्यसभा) तथा राज्य विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य थे।

कुछ रोचक बिंदु:

  • कुल वैध वोट: 10,56,980
  • खाली या अवैध वोट: 15,397 (केवल 1.11%)
  • मुर्मु के व्यक्तिगत वोट: 2,824
  • सिन्हा के व्यक्तिगत वोट: 1,877

प्रत्येक वोट का मूल्य अलग-अलग होता है। संविधान के अनुच्छेद 55 के तहत, 'प्रोपोर्शनल रिप्रजेंटेशन' (समानुपातिक प्रतिनिधित्व) की पद्धति अपनाई जाती है। इसका मतलब है कि एक सांसद का वोट किसी आम विधायक के वोट से ज्यादा भारी होता है। यह सुनिश्चित करता है कि केंद्र और राज्यों का संतुलन बना रहे।

राज्यों का चेहरा: कहां जीत, कहां हार?

जब हम राज्यों के स्तर पर नजर डालते हैं, तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। द्रौपदी मुर्मु ने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 287 वोट पाकर आगे रहा, जबकि यशवंत सिन्हा को वहां केवल 111 वोट मिले। उत्तर प्रदेश का वजन इस चुनाव में बहुत महत्वपूर्ण था।

दूसरी ओर, सिन्हा ने कुछ राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया। राजस्थान में, जहां कुल 200 मतदाता थे, सिन्हा ने 123 वोट हासिल किए compared to मुर्मु के 75। तमिलनाडु में भी सिन्हा आगे रहे—158 वोट बनाम 75। यह दिखाता है कि विपक्षी गठबंधन दक्षिण और पश्चिम में मजबूत था।

लेकिन मुर्मु ने सीक्किम में 32 में से सभी 32 वोट अपने खाते में लगाए। त्रिपुरा में भी उनका कब्जा मजबूत था—41 वोट बनाम 17। ये छोटे राज्यों ने भी बड़ा योगदान दिया।

ऐतिहासिक महत्व: क्यों मायने रखता है?

ऐतिहासिक महत्व: क्यों मायने रखता है?

द्रौपदी मुर्मु की जीत के तीन बड़े ऐतिहासिक पहलू हैं। पहला, वे भारत की पहली आदिवासी मूल की राष्ट्रपति हैं। दूसरा, वे दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं (प्रतिभा पाटील के बाद)। तीसरा, और सबसे दिलचस्प—they were the first president born after India's independence in 1947.

इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि अब राष्ट्रपति पद पर कोई ऐसा व्यक्ति बैठा है जिसने पूरी जिंदगी स्वतंत्र भारत में बिताई है। यह एक नई पीढ़ी का प्रतीक है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत NDA की एकजुटता को दर्शाती है। BJP ने 212,100 वोट (प्रक्षेपित कुल का 42.33%) दिए। JD(U) ने 11,200 वोट दिए। AIADMK ने 700 वोट दिए। इन सबको मिलाकर NDA का कुल योग 458,036 वोट हुआ।

Frequently Asked Questions

द्रौपदी मुर्मु ने किस उम्मीदवार को हराया?

द्रौपदी मुर्मु ने आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के यशवंत सिन्हा को हराया। सिन्हा संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार थे। मुर्मु को 64.03% वोट मिले, जबकि सिन्हा को 35.97% वोट प्राप्त हुए।

राष्ट्रपति चुनाव में मतदान की दर कितनी थी?

2022 के राष्ट्रपति चुनाव में मतदान की दर 99.12% थी। यह बहुत ही उच्च संख्या है, जो दिखाती है कि लगभग सभी योग्य मतदाताओं ने भाग लिया। कुल 4,796 मतदाताओं में से अधिकांश ने अपना वोट डाला।

द्रौपदी मुर्मु की जीत का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

वे भारत की पहली आदिवासी मूल की राष्ट्रपति हैं। इसके अलावा, वे दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं और पहली ऐसे राष्ट्रपति हैं जिनका जन्म 1947 के बाद, अर्थात स्वतंत्र भारत में हुआ था।

राष्ट्रपति चुनाव में वोट कैसे गिने जाते हैं?

वोट 'सिंगल ट्रांसफरेबल वोट' (Single Transferable Vote) पद्धति से गिने जाते हैं। इसमें प्रत्येक वोट का मूल्य अलग होता है। सांसदों के वोट का मूल्य विधायकों के वोट से अधिक होता है ताकि केंद्र और राज्यों का संतुलन बना रहे।

किस राज्य में यशवंत सिन्हा सबसे आगे रहे?

यशवंत सिन्हा राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में आगे रहे। राजस्थान में उन्हें 123 वोट मिले (कुल 200 में से), जबकि द्रौपदी मुर्मु को 75 वोट मिले। तमिलनाडु में सिन्हा को 158 वोट मिले बनाम मुर्मु के 75 वोट।